तुम्हारी ही मेहनत नया एक रंग लाई  है. ..  

सोतों को उठाकरके अलक तुमने जगाई है

ना दिखता था मीलों तलक  कोई भी  निशां

तुम्हारे ही प्रयासों ने हमें मंजिल दिखाई है

फकत चन्द क़दमों की है  दूरी  अब यहाँ 

तुम्हारी ही मेहनत  नया एक रंग लाई है |

#एहसास

#pankaj Mishra 

ये पल आएंगे न दोबारा…

आप सभी लोगों को समर्पित मेरे ये चंद नसार….🍁🍁

खुल के जी लो ये पल ,आएंगे न दोबारा
पता नहीं कब छिन जाये तुम से ये सर्वस्व तुम्हारा
तरस जाओगे मिलने को , और करोगे याद हमीं को
था कोई मेरा भी साथी प्यारा
नजर आएगा सूना सूना ,हर हंसी नजारा
खुल के जी लो ये पल , आएंगे न दोबारा
#पंकज मिश्रा

Perspectives on Going Viral

The WordPress.com Blog

You wake up one morning, check your phone, and spit out your coffee. You have thousands of likes on Facebook, hundreds of retweets, and an inbox that has exploded. Your little blog — which normally gets a dozen views per day and has an audience of exactly two, your spouse and mother — has been shared all over the internet, and that post you wrote last night, in your pajamas, has gone viral.

Going viral is different for everyone, but it can be a strange blend of exciting and terrifying — and very emotional, as writer Sam Dylan Finch described in his recent interview. Here, four bloggers on WordPress.com share their experiences.

Gretchen Kelly, Drifting Through My Open Mind

Gretchen KellyLast November, Gretchen Kelly published “The Thing All Women Do That You Don’t Know About,” in which she described all the tactics women employ to move safely through a world of sexism and harassment. Nearly…

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कह रहे थे हमें जो हर कदम पे अपना …

कह रहे थे हमें जो हर कदम पे अपना ,
हो गए है गुम कहीं दिखा के एक सपना|

अब तो हालात है हो गए इस कदर,
न समझ पा रहे है पराया है कौन और है कौन अपना|

देख कर जो कभी मुस्करा जाते थे ,
आज मुँह फेर लेते है अपना |

अब लिखूँ क्या और कैसे करूँ रचना,
मन के कागज पे कोई अक्स ही न बना |

प्यार की लहरे दिल के समंदर में मचल रही है
और छाया है गम का कुहरा घना|

मन है हैरान सा दिल परेशां सा
क्या क़यामत यहाँ ढा रही है
किससे लुँ में छिपा किसको दूँ में सुना

कह रहे थे हमें जो हर कदम पे अपना
हो गए है गुम कहीं दिखा के एक सपना ||
#पंकज मिश्रा
http://www.pankaj0271.WordPress.com

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speaking pen0271

मुहाजिरनामा

मुहाजिरनामा , मुनव्वर राना  द्वारा 1947 के भारत पाकिस्तान बटवारे के मुहाजिरों पर लिखी गयी एक बहुत ही शसक्त ग़ज़ल हैं। यह एक बहुत लम्बी ग़ज़ल हैं जिसमे कि 504 शेर हैं। अपनी जमीन, अपना घर, अपने लोगो को छोड़ने का गम क्या होता हैं इसको इस ग़ज़ल में बड़ी शिद्द्त से व्यक्त किया गया हैं। 

आप सभी के लिए इस ग़ज़ल के 50 शेर पेश-ए-ख़िदमत :

मुहाजिर हैं मगर हम एक दुनिया छोड़ आए हैं,

तुम्हारे पास जितना है हम उतना छोड़ आए हैं ।

कहानी का ये हिस्सा आज तक सब से छुपाया है,

कि हम मिट्टी की ख़ातिर अपना सोना छोड़ आए हैं ।

नई दुनिया बसा लेने की इक कमज़ोर चाहत में,

पुराने घर की दहलीज़ों को सूना छोड़ आए हैं ।

अक़ीदत से कलाई पर जो इक बच्ची ने बाँधी थी,

वो राखी छोड़ आए हैं वो रिश्ता छोड़ आए हैं ।

किसी की आरज़ू के पाँवों में ज़ंजीर डाली थी,

किसी की ऊन की तीली में फंदा छोड़ आए हैं ।

पकाकर रोटियाँ रखती थी माँ जिसमें सलीक़े से, 

निकलते वक़्त वो रोटी की डलिया छोड़ आए हैं ।

जो इक पतली सड़क उन्नाव से मोहान जाती है,

वहीं हसरत के ख़्वाबों को भटकता छोड़ आए हैं ।

यक़ीं आता नहीं, लगता है कच्ची नींद में शायद, 

हम अपना घर गली अपना मोहल्ला छोड़ आए हैं ।

हमारे लौट आने की दुआएँ करता रहता है,

हम अपनी छत पे जो चिड़ियों का जत्था छोड़ आए हैं ।

हमें हिजरत की इस अन्धी गुफ़ा में याद आता है,

अजन्ता छोड़ आए हैं एलोरा छोड़ आए हैं ।

सभी त्योहार मिलजुल कर मनाते थे वहाँ जब थे,

दिवाली छोड़ आए हैं दशहरा छोड़ आए हैं ।

हमें सूरज की किरनें इस लिए तक़लीफ़ देती हैं,

अवध की शाम काशी का सवेरा छोड़ आए हैं ।

गले मिलती हुई नदियाँ गले मिलते हुए मज़हब,

इलाहाबाद में कैसा नज़ारा छोड़ आए हैं ।

हम अपने साथ तस्वीरें तो ले आए हैं शादी की,

किसी शायर ने लिक्खा था जो सेहरा छोड़ आए हैं ।

कई आँखें अभी तक ये शिकायत करती रहती हैं, 

के हम बहते हुए काजल का दरिया छोड़ आए हैं । 

शकर इस जिस्म से खिलवाड़ करना कैसे छोड़ेगी, 

के हम जामुन के पेड़ों को अकेला छोड़ आए हैं । 

वो बरगद जिसके पेड़ों से महक आती थी फूलों की,

उसी बरगद में एक हरियल का जोड़ा छोड़ आए हैं । 

अभी तक बारिसों में भीगते ही याद आता है,

के छप्पर के नीचे अपना छाता छोड़ आए हैं । 

भतीजी अब सलीके से दुपट्टा ओढ़ती होगी,

वही झूले में हम जिसको हुमड़ता छोड़ आए हैं । 

ये हिजरत तो नहीं थी बुजदिली शायद हमारी थी,

के हम बिस्तर में एक हड्डी का ढाचा छोड़ आए हैं । 

हमारी अहलिया तो आ गयी माँ छुट गए आखिर,

के हम पीतल उठा लाये हैं सोना छोड़ आए हैं । 

महीनो तक तो अम्मी ख्वाब में भी बुदबुदाती थीं,

सुखाने के लिए छत पर पुदीना छोड़ आए हैं । 

वजारत भी हमारे वास्ते कम मर्तबा होगी,

हम अपनी माँ के हाथों में निवाला छोड़ आए हैं । 

यहाँ आते हुए हर कीमती सामान ले आए,

मगर इकबाल का लिखा तराना छोड़ आए हैं । 

हिमालय से निकलती हर नदी आवाज़ देती थी,

मियां आओ वजू कर लो ये जूमला छोड़ आए हैं । 

वजू करने को जब भी बैठते हैं याद आता है,

के हम जल्दी में जमुना का किनारा छोड़ आए हैं । 

उतार आये मुरव्वत और रवादारी का हर चोला,

जो एक साधू ने पहनाई थी माला छोड़ आए हैं । 

जनाबे मीर का दीवान तो हम साथ ले आये,

मगर हम मीर के माथे का कश्का छोड़ आए हैं । 

उधर का कोई मिल जाए इधर तो हम यही पूछें,

हम आँखे छोड़ आये हैं के चश्मा छोड़ आए हैं । 

हमारी रिश्तेदारी तो नहीं थी हाँ ताल्लुक था, 

जो लक्ष्मी छोड़ आये हैं जो दुर्गा छोड़ आए हैं । 

गले मिलती हुई नदियाँ गले मिलते हुए मज़हब, 

इलाहाबाद में कैसा नाज़ारा छोड़ आए हैं । 

कल एक अमरुद वाले से ये कहना गया हमको, 

जहां से आये हैं हम इसकी बगिया छोड़ आए हैं । 

वो हैरत से हमे तकता रहा कुछ देर फिर बोला, 

वो संगम का इलाका छुट गया या छोड़ आए हैं। 

अभी हम सोच में गूम थे के उससे क्या कहा जाए,

हमारे आंसुओ ने राज खोला छोड़ आए हैं । 

मुहर्रम में हमारा लखनऊ इरान लगता था, 

मदद मौला हुसैनाबाद रोता छोड़ आए हैं ।

जो एक पतली सड़क उन्नाव से मोहान जाती है,

वहीँ हसरत के ख्वाबों को भटकता छोड़ आए हैं ।

महल से दूर बरगद के तलए मवान के खातिर,

थके हारे हुए गौतम को बैठा छोड़ आए हैं ।

तसल्ली को कोई कागज़ भी चिपका नहीं पाए,

चरागे दिल का शीशा यूँ ही चटखा छोड़ आए हैं । 

सड़क भी शेरशाही आ गयी तकसीम के जद मैं,

तुझे करके हिन्दुस्तान छोटा छोड़ आए हैं । 

हसीं आती है अपनी अदाकारी पर खुद हमको,

बने फिरते हैं युसूफ और जुलेखा छोड़ आए हैं । 

गुजरते वक़्त बाज़ारों में अब भी याद आता है,

किसी को उसके कमरे में संवरता छोड़ आए हैं ।

हमारा रास्ता तकते हुए पथरा गयी होंगी,

वो आँखे जिनको हम खिड़की पे रखा छोड़ आए हैं । 

तू हमसे चाँद इतनी बेरुखी से बात करता है 

हम अपनी झील में एक चाँद उतरा छोड़ आए हैं । 

ये दो कमरों का घर और ये सुलगती जिंदगी अपनी,

वहां इतना बड़ा नौकर का कमरा छोड़ आए हैं । 

हमे मरने से पहले सबको ये ताकीत करना है , 

किसी को मत बता देना की क्या-क्या छोड़ आए हैं ।

 दुआ के फूल जहाँ पंडित जी तकसीम करते थे

वो मंदिर छोड़ आये हैं वो शिवाला छोड़ आये हैं

हमीं ग़ालिब से नादीम है हमीं तुलसी से शर्मिंदा

हमींने मीरको छोडा है मीरा छोड आए हैं

अगर लिखने पे आ जायें तो सियाही ख़त्म हो जाये

कि तेरे पास आयें है तो क्या-क्या छोड आये हैं

ग़ज़ल ये ना-मुक़म्मल ही रहेगी उम्र भर “राना”

कि हम सरहद से पीछे इसका मक़्ता छोड आयें है।

कभी कभी इसको पढ़कर लगता है हम जैसे लोग भी बहुत कुछ छोड़ आएं। अपनी जड़ से दूर जाने वाले दिन प्रतिदिन कार्यों के चलते  यह दूरी बढ़ती ही जा रही  है।

बस आप सबसे साझा करने का मन रोक ना सका तो भेज दिया आपके समक्ष..💐💐🌹🐠🌞🌙☔🌈

Modified Jul 24, 07:27

सच्चा मित्र

मिल जाते है कुछ शख्श यहाँ जो दिल में बस जाते है;

कुछ अनजाने कुछ भोले से अपने हो जाते है ,

क्या सुख और क्या दुःख हर क्षण ये साथ निभाते है ;

इस निर्वन भूमि पर ये वृक्ष एक बन जाते है ,

कभी धूप में छांव दिलाते कभी खुद ही मिट जाते है; 

क्या और कहूँ इन शख्शों को यही सच्चे मित्र कहे जाते है|| 

#पंकज मिश्रा

इंतज़ार

कितने अरसे बाद आये हो ..

मुकद्दर से मेरी मुलाकात तो होने दो

चले जाओगे ऐसे ही तुम बिखेरे बिना रोशनी…

दो पल जरा ठहर जाओ अभी रात तो होने दो |

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Top beaches of goa (India)

Top five beach

Goa’s 103 km coastline is blessed with the most enchanting beaches

Forget the beaches of Australia, Thailand or Bali and head to some of the most amazing beaches of Goa. The former Portuguese colony boasts of some incredibly scenic beaches that offer everything from parties to adventure, solitude to sunbathing.

We list five of the best beaches of Goa.

Mandrem Beach

Situated in North Goa, Mandrem is a tranquil beach and counted among the most beautiful beaches in Asia. Serene and scenic, Mandrem is preferred by honeymooners. The secluded beach provides the much needed privacy for the honeymooners.

A sleepy small village, there is nothing much to do in Mandrem. Laze around on the beach or take a swim in the clear waters or visit the eateries to enjoy local food, Mandrem is ideal for do-nothing vacation.

Agonda Beach

Counted among the most scenic beaches in Asia, Agonda Beach is serene and clean beach. It is ideal if you want to spend time meditating, catch up on your reading or simply, enjoying the sun.

Renowned for its beach parties, some of Goa’s beaches are also ideal for enjoying in solitude

Agonda is relatively less crowded than the other beaches of Goa. And that means lesser crowds, more privacy and loads of opportunities to enjoy solitude.

If you crave for some activity, jump on a country boat and go dolphin spotting. Cabo de rama and Cola beach are also worth a visit.

Baga Beach

One of the most popular tourist spots in Goa, Baga is known for its beach parties, nightlife and amazing seafood served at its beach shacks and restaurants.

During tourist season, the beach is line with rows of shacks. It is famous for its water sports and dolphin cruises. If interested in wind surfing Baga beach also offers an opportunity to enjoy Wind Surfing between January and March. National Wind Surfing Championship is also conducted every year around September – November at the Baga beach.

Sun, surf, sand and awesome cuisine — Goa’s beaches offers it all

Candolim Beach
Situated very close to Baga, Candolim’s beach is counted amongst the most beautiful beaches in India. Under the shadow of popular beaches like Baga and Calangute, Candolim escapes the hordes that visit Goa during peak season.

Candolim village has another reason to fame. It was the first village to convert to Christianity in the 16th century.

Cavelossim Beach

Situated at the mouth of Sal River, Cavelossim beach is serene, flanked by paddy fields and coconut groves. As most tourists head for the more popular beaches, Cavelossim witnesses less crowds. Its contrasting black rocks and white sand make it a delightful beach for a pleasant evening.

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A Morning

When the sun rises,
Day begins , then it plays
A farmer who goes to farms,
Birds Chippering in their sounds,
They flying high in sky with no bounds;
Waiting is over the sun spreads  its rays all around,
How lovely looks that ground,
Which seems yellowish all around;
Everyone is in hurry;
To reach their workplace they worry,
It seems everyone is busy.

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