Tere liye..

मैं और तुम, तुम और मैं,

चलो ना ढूंढते है, हम खुद को एक दूजे में

#एहसास

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फिर तमस में डूबने को ये शख्स मजबूर है,
रोशनी  ए जिंदगी की महफिले अभी दूर है ||
#एहसास
– पंकज मिश्रा

बड़ी कातिलाना है तेरी निगाहें
भँवर में इनके हम फंसते ही जाए
अब कोई तो बचा लो मुझे इस जहाँ से
कि अब जहाँ भी जाएं येही नजर आएं||
#pankaj

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फिर न रहेगी कोई बात जात की …

अगर हमें बुनियादी सुविधाये मिल जाए अर्थात खाने के लिए रोटी , पीने के लिए पानी,  और पहनने के लिए। कपडा .. फिर कैसा भेदभाव , कैसा वर्गवाद…आखिर कब हम समता व् विश्व बंधुत्व का सपना साकार करेंगे

फिर बरत देंगे हम एहतियात
कर दे गर कोई एहतमाम काम की
गुजारिश रहेगी न फिर कोई और
हो जाये जो  गर सह मात की
बदल लेंगे हम नक्शा अपने हुश्न का
फिर न रहेगी कोई बात जात की ||

#आकार

-पंकज मिश्रा

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