अगर तुम हमसफ़र होते..

यूँ तन्हाइयों में न दिन बसर होते।

सफर आसान हो जाता अगर तुम हमसफ़र होते।।
गीत तेरी यादों के न अधरों से मुखर होते।
इन आंखों से निकले आँसू न फिर जहर होते।।
न एक-एक पल फिर आठ-आठ पहर होते।
अगर तुम हमसफ़र होते..।।

©पंकज मिश्रा

Picture with sad quotes
#speakingpen
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साथ देता नहीं कोई आजकल..

मर रहा हूँ मैं तो पल-पल

साथ देता नहीं कोई आजकल।।
इससे पहले कि हो जाऊं विकल।
दे दे मुझको मेरा कोई हल।।
शांत सा हूँ खड़ा जैसे शैल अचल।
चाह कर भी नहीं मैं हूँ पाता चल।।
एक सहारा मिले तो मैं जाऊँ संभल।
फिर ये जीवन कठिन से हो जाये सरल।।
©पंकज मिश्रा

फिर तमस में डूबने को ये शख्स मजबूर है,
रोशनी  ए जिंदगी की महफिले अभी दूर है ||
#एहसास
– पंकज मिश्रा

बड़ी कातिलाना है तेरी निगाहें
भँवर में इनके हम फंसते ही जाए
अब कोई तो बचा लो मुझे इस जहाँ से
कि अब जहाँ भी जाएं येही नजर आएं||
#pankaj

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फिर न रहेगी कोई बात जात की …

अगर हमें बुनियादी सुविधाये मिल जाए अर्थात खाने के लिए रोटी , पीने के लिए पानी,  और पहनने के लिए। कपडा .. फिर कैसा भेदभाव , कैसा वर्गवाद…आखिर कब हम समता व् विश्व बंधुत्व का सपना साकार करेंगे

फिर बरत देंगे हम एहतियात
कर दे गर कोई एहतमाम काम की
गुजारिश रहेगी न फिर कोई और
हो जाये जो  गर सह मात की
बदल लेंगे हम नक्शा अपने हुश्न का
फिर न रहेगी कोई बात जात की ||

#आकार

-पंकज मिश्रा

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