एक विद्यार्थी का भटकाव के बाद एहसास……

बुला रही है हमें वो दुनियां जिसके हम आदी है
क्या सौगाते हमें मिली है यहाँ सिवाय बर्बादी के
भूल हुई थी शायद हमसे उसको प्यार समझ बैठे थे
आज समझ है आया वो  किताब ही यार पुरानी है
अब सोचा है बंद करूँ ये क्षण क्षण की बर्बादी को
शायद मकसद मिल जाये इस पुराने आदी को
किसके लिए करूँ में टाइप
कोई तो यहाँ न मेरा है
अब तो हर जगह है दिखता बस किताबों का ढेरा है

#पंकज मिश्रा

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