एक शिक्षक की दास्ताँ …

एक एक शब्द जैसे कोई दास्ताँ बयां कर रहा हो
जैसे कोई दीपक अँधेरे में रोशनी भर रहा हो
ये हमारी अधूरी सी कहानी है
हमें तो सारी दुनियां बनानी है
क्या बतलाऊ में तुमको जब तुम  कोई ख्वाब बुनते हो
रोम रोम खिल जाता है जब तुम वो हाँसिल करते हो
फिर भी क्या हालात बना डाले है मेरे इन सरकारों ने
जीना मुश्किल बना दिया है लोगों के तानों ने
लेकिन मेरी हर एक बात उनके हित में ही होती है
देख के हालत खुद की ये आत्मा खुद पे रोती है
#पंकज मिश्रा

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