दिसंबर न जाने क्यूँ खास लगता है..

सर्द हवाएँ सर्द मौसम और सर्द जज्बात रखता है,

कुछ इस तरह के हालात रखता है,
दिसंबर जाने क्यूँ खास लगता है|
इन्हीं दिनों कुहरा धीरे-धीरे उत्तर में बढ़ता है,
सूरज भी यदा-कदा ऊपर को चढ़ता है|
जैसे-तैसे मुझसे मेरा ये दिल संभलता है,
लेकिन तुझसे मिलने को ये मन मचलता है|
जुदा- जुदा सा होकर भी तू पास लगता है,
कितना अनुपम ये एहसास लगता है,
दिसंबर जाने क्यूँ खास लगता है|
सुबह -शाम को हवा बर्फ सी चुभती है,
कपड़ों से लदी हुई वो और भी सुंदर दिखती है|
कंपकपाते बदन को राहत मिल जाती है,
बुझे हुए कोयले को जब वो चिंगारी दिखलाती है|
यहाँ-वहाँ देखो धरती तो आकाश लगता है,
दिसंबर न जाने क्यूँ खास लगता है|
#एहसास
– पंकज मिश्रा
#speakingpen

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