दर्द बेरोजगारी का मुझे बहुत तड़पाता है…

देश में व्याप्त शैक्षिक आरक्षण के कारण व सरकार की दोषपूर्ण नीतियों से ग्रसित एक बेरोजगार छात्र का दर्द..

##बेरोजगार..पर भारी आरक्षण

अंधकार ये गुमनामी का मुझे बहुत डराता है,
दर्द बेरोजगारी का मुझे बहुत तड़पाता है|

नींदे भी रातों में मुझे कहाँ अब आती है,
पढ़ते-पढ़ते पता नही सुबह कब हो जाती है|

घरवाले धक्का देते है और जमाना चिल्लाता है,
लाख छिपाने पर भी ये दर्द आँखों से छलक जाता है|

जैसे तैसे फार्म भरकर पेपर देकर मैं आता हूँ ,
आरक्षण का दानव लेकिन पल में चट सब कर जाता है|

70 और 74 पर एससी, ओबीसी आते है लेकिन जनरल वाला 80 पर भी मिस कर जाता है|

जोरों पर युद्ध छिड़ा है वोट का काँटा यहीं अड़ा है,
आरक्षण(भीखों) की सौगातें ले नेता मंचों पर यहाँ खड़ा है|

सबकी बेहतर तैयारी है पिछड़े बनने की जंग यहाँ पर जारी है|
दुनिया के एक युवा देश में फैली खतरनाक बीमारी है|

लायक से नालायक जब कोई बेटा बन जाता है,
आरक्षण अब नहीं मिटेगा जब मंचों से नेता कोई कह जाता है|
शर्म आती है राजनीति पर और आँख से आँसू आता है,
आरक्षण की लपटों से जब देश झुलस ये जाता है|
-पंकज मिश्रा
#speakingpen
#pankajmishrapoetries

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