छत..लघु कथा

झुलसती हुई गर्मी के कारण सबका हाल बेहाल था ऐसे में इंद्र देव की मेहरबानी व वर्षा ऋतु होने के कारण काले बादलों ने आसमान घेर लिया था| सब अपने घरों की ओर भाग रहे थे पक्षी भी अपने घोंसलों में जा चुके थे|

हर बार की तरह फुटपाथ पर बैठा वह बालक अपनी माँ से पूछ रहा था-“माँ ये छत टपक क्यूँ रही है”?

और हर बार की तरह निशब्द माँ एकटक आसमान को निहारे जा रही थी|

-पंकज मिश्रा

#speakingpen

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2 thoughts on “छत..लघु कथा

  1. Rekha Sahay October 18, 2017 / 11:28 am

    dard bhakri kahani. Thanks a lot for following my blog, Happy blogging.

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