मजदूर

आज विश्व मजदूर दिवस के अवसर पर  एक मजदूर को आपके सामने चरितार्थ करने का एक प्रयास ..
‘मजदूर’

बहुत कुछ हार जाता है,

महज एक चंद रोटी को ;

क्या क्या नही करता,

निभाने जीवन कसौटी को;

बड़ी जिल्लत उठाता है, 

मगर बस सहता रहता है; 

कभी होकर खड़े किसी खेत में,

कभी रहकर पड़े दिन भर रेत में;

फर्ज अपना निभाता है|

गिराकर चंद बूँदे स्वेद की धरा पर,

मुकद्दर अपना बनाता है| 

बहुत कुछ हार जाता है …!!

#मजदूर

– पंकज मिश्रा

#internationallabourday

#speakingpen

For more poetries & songs please visit :

http://www.pankaj0271.wordpress.com

speakingpen

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