माँ

माँ के बारे में लिखना असंभव लेकिन एक छोटा सा प्रयास..आज मातृत्व दिवस सभी माताओं को शुभकामनाएं 
माँ धरती से आसमां तक का है विस्तार ||

जीवन की इस बगिया में है फूलों का उपहार ||

माँ प्रकृति की गोद में है नदियों की धार||

गीता , कुरान, गुरु ग्रंथ का है माँ ही  सार||
माँ अंदर मौजूद है, माँ ही है बाहर||

माँ ही मंदिर, माँ ही मस्जिद,माँ ही है गिरजाघर||

माँ से ही उत्पन्न हुए है माँ ही पालनहार||

माँ से ही आकार मिला है माँ में ही हो जाएगा सबका समाहार||
मेरी भी विनती सुन लो माँ, मुझ पर करो उपकार||

जीवन के मरुथल में भर दो जल रूपी कासार ||

रहे न कोई छल मन में और न हो व्यभिचार||

कृपा की बारिश कर दो ऐसी हर स्वप्न हो साकार ||

– पंकज मिश्रा

#मातृत्वदिवस2017

Advertisements

मजदूर

आज विश्व मजदूर दिवस के अवसर पर  एक मजदूर को आपके सामने चरितार्थ करने का एक प्रयास ..
‘मजदूर’

बहुत कुछ हार जाता है,

महज एक चंद रोटी को ;

क्या क्या नही करता,

निभाने जीवन कसौटी को;

बड़ी जिल्लत उठाता है, 

मगर बस सहता रहता है; 

कभी होकर खड़े किसी खेत में,

कभी रहकर पड़े दिन भर रेत में;

फर्ज अपना निभाता है|

गिराकर चंद बूँदे स्वेद की धरा पर,

मुकद्दर अपना बनाता है| 

बहुत कुछ हार जाता है …!!

#मजदूर

– पंकज मिश्रा

#internationallabourday

#speakingpen

For more poetries & songs please visit :

http://www.pankaj0271.wordpress.com

speakingpen