अपना भी एक घर होगा..

देखे है मैंने जाकरके,

रंग -बिरंगे रूप सदन के;

इस कोने से उस कोने तक 

खड़े हुए थे तले गगन के 

किसी का लंबा, किसी का चौड़ा 

और किसी का छोटा है

लेकिन सबसे मिलकर जाना 

लगता उनको वो अपना है

सर्दी, गर्मी और बरसातों में,

हरदम वो साथ निभाता है|

हर मुश्किल आसान बनाकर,

कितना सुख पहुंचाता होगा; 

कितने खुशकिस्मत होंगे वो,

जिनका अपना एक घर होगा| 

अपना भी एक सपना है,

भीड़ भरी इस दुनियां में;

अपना भी एक घर होगा,

जाने कौन शहर होगा|

#घर

-पंकज मिश्रा

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