इस दिल में मेरे घर कर जाते हो ..

कभी पन्नों पर , कभी किताबों पर 

तो कभी ख्यालों पर शहर कर जाते हो 

सोचता हूँ  तुझे मैं जब भी  कभी बैठकर

तुम इस दिल में मेरे घर कर जाते हो 

डूब जाता है जब मेरी चाहतों का सूरज 

तेरे मिलने की उम्मीद वाले रास्तों से होकर

एक पल में तभी मुझको  याद आकर 

 इन स्याह रातों को भी सुबह कर जाते हो 

है नहीं अब खुद को भी  ये खबर

कैसे कट पायेगा बिन तेरे ये सफ़र 

अब कैसे सुनाये पंकज हाल ए जिगर 

ख्वाब में मेरे रात भर तुम ही तुम आते हो |

कभी पन्नों पर, कभी किताबों पर

तो कभी ख्यालों पर , शहर कर जाते हो||

#पंकज मिश्रा

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कश्मीर का प्रश्न …

आजकल घाटी में जो हालात है उसे देख कर ह्रदय में जो वेदना उत्पन्न हुई उसको शब्दों के माध्यम से आप तक पहुँचाने का प्रयास किया है उम्मीद करता हूँ  आप सब का समर्थन मिलेगा ..

देख देख हालात घाटी के व्यथित हुआ है मेरा मन
साये से भी डर लगता है अब कैसे काटें जीवन

हर ओर सुनाई देता है अब मुझको करुण कृन्दन
झुलस रही है हर एक बस्ती और छाई है नफरत की तपन

हर रोज चढ़ावा चढ़ता है और होता है तन का अर्पण
है खून ख़ौलता सुन सुनकर फिर हार गया कोई जीवन

सरकारें आती जाती है और मिलते है नए कथन
जाने कब हो पायेगा हल ये कश्मीर का प्रश्न

कोई तो ऐसी बात करे जो मिल सके तुरंत निवारण
कुछ कर दो ऐसा मोदी जी, जी सके चैन से हर एक जन

है वतन हमारा मांग रहा चहुँ ओर चैन और अमन
देख देख हालात घाटी के व्यथित हुआ है मेरा मन
साये से भी डर लगता है अब कैसे काटे जीवन ||
#पंकज मिश्रा

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