जिसको जितना चाहा मैंने , जिसको जितना प्यार किया..

जिसको जितना  चाहा मैंने

जिसको जितना प्यार किया

उसने ही इस नाजुक दिल पर 

शतकों वार प्रहार किया

ये कैसी नादानी थी 

ये कैसा व्यवहार किया

भूल हुई थी हमसे 

ये तो खता हमारी थी 

जो तुमसे इकरार किया

जिसको जितना चाहा मैंने 

जिसको जितना प्यार किया 

साथ रहा हर मौसम में 

खुद को तुम पर वार दिया

खलिस रहेगी बस सदा यही 

क्या कमी हुई या वजह रही

जो तुमने तकरार किया||

#एहसास

 – पंकज मिश्रा
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फिर वही चाँदनी रात आई है..

फिर वही चाँदनी रात आई है

साथ तारों की बारात लाई है

चूम के धरती के हर एक कोने को रोशन है किया

फिर से दोनों ने एक दूसरे पर यकीन  है किया

उम्र भर साथ देने की  कसम खाई है 

फिर वही चांदनी रात आई है ||

#एहसास

– पंकज मिश्रा
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मैं हँसते हँसते अश्रु पी जाऊँ इतना हौसला दे तू….

अटल करके कहीं मुझको स्थिर करा दे तू

मैँ हँसते हँसते अश्रु पी जाऊँ इतना हौसला दे तू 

कभी जो गिर पडूँ थक कर कहीं बेबस 

मुझे धक्का लगा करके मेरी हिम्मत बढ़ा दे तू

#मुक्तक

 – पंकज मिश्रा

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खुदा जाने ये कैसा करिश्मा है मोहब्बत में…

कोई साजिश है न कोई खिलाफत है
हर एक हिस्सें में इस घर के सिर्फ तेरी जियाफत है|
है कैसा मोड़ ये जज्बात ए ख्वाइश का
जहाँ देखो वहां हमदम तेरी नजाकत है |
सजे  है हर गली कोने यहाँ तेरी इबादत में
खुदा जाने ये कैसा करिश्मा है मोहब्बत में ||
#एहसास
– पंकज मिश्रा
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अभी पूरा पड़ा पढ़ना यहाँ अखबार बाक़ी है ..

हज चंद लफ्जों क़ी तुम्हे अभी जानकारी है
अभी पूरा पड़ा पढ़ना यहाँ अख़बार बाकी है
तो क्या हुआ जो चल पड़े दो चार  कदम यहाँ
अभी तो पाना यहाँ तुम्हे एक रफ्तार बाकी है
हो उतरे तुम अभी ही तो इस समंदर में
जरा ठहरो यहाँ कुछ पल अभी तो लहरों का दीदार बाकी है |
तो क्या हुआ जो मंजिल का नही दिखता कोई निशां यहाँ
अंतस में दबा वो हिम्मत का निकलना  अभी गुब्बार बाकी है
अभी पूरा पड़ा पढ़ना यहाँ अख़बार बाकी है ||
#एहसास
– पंकज मिश्रा
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जी नही पाऊंगा पिता यहाँ में तुझ बिन..

हरदम चिंताओं से व्यथित दिन के उजालों सा तेरा मन

न बोल के भी सब कुछ बयां कर देता है तेरा ये तन

कि किस तरह व्यतीत करता है तू मेरे लिए अपना हर दिन

आसां नही होगा जीना बिना तेरे ये निर्मम जीवन

निश्चित ही माँ का प्यार अनूठा है पर जी नही पाऊंगा पिता यहाँ  मैं तुझ बिन

इस समस्त संसार में शायद ही तुझसा कोई हो 

बडा ही सौभाग्यशाली हूँ जो तुम मेरे साथ हो 

कर लिया है मैंने खुद से आज एक प्रण

बनूँगा तुझ सा मैं और करूँगा सब कुछ अर्पण

#एहसास

 – पंकज मिश्रा

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फिर तमस में डूबने को ये शख्स मजबूर है,
रोशनी  ए जिंदगी की महफिले अभी दूर है ||
#एहसास
– पंकज मिश्रा

बड़ी कातिलाना है तेरी निगाहें
भँवर में इनके हम फंसते ही जाए
अब कोई तो बचा लो मुझे इस जहाँ से
कि अब जहाँ भी जाएं येही नजर आएं||
#pankaj

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