इस अँधेरी रात में डूबता सा जा रहा हूँ…

इस अँधेरी रात में डूबता सा  जा रहा हूँ
डूब कर भी कहीं न कहीं मुस्का रहा हूँ |

फिर कहीं किसी और जग में विचरता जा रहा हूँ
क्या पता किस ओर है  जरुरत मेरी किसे ,
इस दफह न उस दफह  ही सही
किसी के काम आ रहा हूँ|

सोचता हूँ कभी क्या मिला था , क्या है मिला और क्या आगे मिलेगा ,
बस निरंतर खोज में आगे खिसकता जा रहा हूँ |

इस अँधेरी रात में डूबता सा जा रहा हूँ
डूबकर भी कहीं न कही मुस्का रहा हूँ |

#पंकज मिश्रा

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